खिलचिपुर नगर परिषद की विशेष बैठक में हंगामा, अध्यक्ष राम जानकी मलाकार रो पड़ीं

By: MPLive Team

On: Wednesday, November 5, 2025 7:11 PM

खिलचिपुर नगर परिषद की विशेष बैठक में हंगामा, अध्यक्ष राम जानकी मलाकार रो पड़ीं
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राजगढ़ जिले की खिलचिपुर नगर परिषद की मंगलवार को आयोजित विशेष बैठक में हंगामे का माहौल बन गया। बैठक का उद्देश्य विकास कार्यों से जुड़े प्रस्तावों पर चर्चा करना था, लेकिन अचानक अध्यक्ष राम जानकी मलाकार और कुछ पार्षदों के बीच बहस इतनी गर्म हो गई कि अध्यक्ष भावुक होकर रो पड़ीं और बैठक को बीच में ही स्थगित करना पड़ा। इस घटना ने परिषद के सदस्यों और उपस्थित लोगों को चौंका दिया।

विवादित प्रस्ताव और बहस

बैठक दोपहर 2 बजे शुरू हुई, जिसमें क्षेत्रीय विधायक हज़ारीलाल डांगी, अध्यक्ष राम जानकी मलाकार, उपाध्यक्ष शीतल शर्मा, और अन्य पार्षद मौजूद थे। शुरुआत में चार प्रस्ताव—नामांतरण स्वीकृति, वन कंट्री, वन इलेक्शन, GST और स्वदेशी आत्मनिर्भर भारत—सहमति से पास हो गए। लेकिन विवाद उस समय खड़ा हुआ जब जल विभाग की जमीन पर सीमा दीवार निर्माण और जिला भवन निर्माण के लिए सरकारी भूमि देने का प्रस्ताव रखा गया। कुछ पार्षदों ने इसका विरोध किया और कहा कि नगर परिषद की भूमि जिले को नहीं दी जानी चाहिए और जल विभाग की भूमि पर बिना सीमांकन के निर्माण नहीं होना चाहिए।

खिलचिपुर नगर परिषद की विशेष बैठक में हंगामा, अध्यक्ष राम जानकी मलाकार रो पड़ीं

MLA और पार्षद के बीच बहस

बैठक के दौरान विधायक हज़ारीलाल डांगी और पार्षद संदीप शर्मा के बीच तीखी बहस हुई। विधायक ने कहा, “अगर आप इस तरह काम करेंगे, तो कुछ भी नहीं होगा।” इसके जवाब में पार्षद संदीप शर्मा ने पलटकर कहा, “सर, वैसे भी काम तो हो ही कहाँ रहा है?” विधायक ने फिर पूछा, “तो मजदूर क्या कर रहे हैं?” इस पर पार्षद ने उत्तर दिया, “सोयाबीन की फसल काट रहे हैं।” यह सुनकर अध्यक्ष राम जानकी मलाकार क्रोधित हो गईं और भावुक होकर जोर-जोर से तालियां बजाने लगीं और अंततः रो पड़ीं।

बैठक स्थगित, पार्षदों ने शांत किया प्रयास

महिला पार्षद और विधायक ने उन्हें शांत करने का प्रयास किया, लेकिन अध्यक्ष कई बार बैठक के दौरान रोती हुई दिखाई दीं। हंगामे के चलते बैठक को बीच में ही रोकना पड़ा। परिषद के सदस्यों और उपस्थित लोगों के लिए यह दृश्य बेहद चौंकाने वाला था। घटना ने नगर परिषद में अधिकारियों और पार्षदों के बीच बढ़ते तनाव को उजागर किया और प्रशासनिक कार्यों के संचालन पर गंभीर सवाल उठाए। इस विवाद ने यह स्पष्ट कर दिया कि विकास कार्यों और भूमि वितरण के मामलों पर पार्षदों और अधिकारियों के बीच मतभेदों को सुलझाना अब अत्यंत आवश्यक है।

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