एमपी में उर्वरक की किल्लत दूर करने की तैयारी, ई-टोकन सिस्टम से मिलेगी घर-घर खाद की सुविधा

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मध्यप्रदेश में लंबे समय से उर्वरक की कमी से परेशान किसानों के लिए अच्छी खबर है। राज्य सरकार अब सीधे किसानों के घर तक खाद पहुंचाने की नई सुविधा शुरू करने जा रही है। ई-टोकन उर्वरक वितरण प्रणाली के तहत शुरू हो रही यह व्यवस्था पायलट प्रोजेक्ट के रूप में तीन जिलों—विदिशा, शाजापुर और जबलपुर—में सबसे पहले लागू होगी।

ई-टोकन से होगी बुकिंग, मिलेगी होम डिलीवरी

नई प्रणाली के अनुसार किसान खाद की बुकिंग के साथ ही होम डिलीवरी का विकल्प भी चुन सकेंगे। प्रारंभिक चरण में पांच किलोमीटर के दायरे में खाद पहुंचाने की तैयारी की गई है। अधिकारियों के अनुसार, व्यवस्था सफल रहने पर इसे पूरे प्रदेश में लागू किया जाएगा।

ई-टोकन सिस्टम पहले से ही उर्वरक वितरण में पारदर्शिता लाने के उद्देश्य से लागू है, लेकिन अब इसमें होम डिलीवरी जोड़ने से किसानों को बड़ी राहत मिलने की उम्मीद है।

किसानों को लंबी लाइनों से मिलेगी मुक्ति

प्रदेश के कई जिलों में पिछले दिनों खाद की कमी के चलते किसानों को घंटों लाइन में लगना पड़ रहा था। स्थिति यह थी कि कई स्थानों से सुबह-सवेरे से लेकर दोपहर तक किसानों की भीड़ लगने की खबरें सामने आती रहीं। पुरुषों के साथ महिलाएं भी लाइन में खड़ी होकर उर्वरक लेने को मजबूर थीं।

किसानों का कहना था कि विभागीय दावों के बावजूद उन्हें पर्याप्त मात्रा में खाद उपलब्ध नहीं हो पा रही थी। ऐसे में घर-घर उर्वरक पहुंचाने की नई सुविधा से भारी संख्या में किसानों को राहत मिलेगी।

पायलट प्रोजेक्ट सफल रहा तो पूरे प्रदेश में लागू होगी योजना

कृषि विभाग के अधिकारियों का कहना है कि विदिशा, शाजापुर और जबलपुर में मिलने वाली प्रतिक्रिया के आधार पर आगे की रणनीति तय की जाएगी। यदि वितरण प्रणाली सुचारु रही और किसानों को वास्तविक लाभ मिला, तो अगले चरण में अन्य जिलों में भी यह सुविधा शुरू करने पर विचार किया जाएगा।

किसानों के लिए बड़ी राहत बनने की उम्मीद

नई व्यवस्था से न केवल भीड़ और अव्यवस्था कम होगी, बल्कि किसानों का समय भी बचेगा। खास तौर पर ग्रामीण इलाकों में रहने वाले किसानों के लिए यह कदम खेती की तैयारी के बीच महत्वपूर्ण साबित हो सकता है।

देवेन्द्र पाण्डेय "संपादक"

ऋषि श्रृंगी मुनि की तपोभूमि सिंगरौली की पावन धरा से निकला. पठन-पाठन से प्यार था लिहाजा पत्रकारिता से बेहतर पेशा कोई और लगा नहीं. अखबार से शुरु हुआ सफर टीवी और डिजिटल मीडिया के माध्यम में जारी है. इस दौरान करीब 14 साल गुजर गए पता ही नहीं चला. Read More
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