मध्य प्रदेश के उज्जैन जिले में आरएसएस की शोभायात्रा का वक्फ बोर्ड द्वारा स्वागत करना बड़ा विवाद बन गया है। आरएसएस की 100वीं वर्षगांठ पर वक्फ बोर्ड अध्यक्ष डॉ. सन्वर पटेल और मुस्लिम समुदाय के कई लोगों ने शोभायात्रा पर पुष्पवर्षा की। इस कदम को जहां कई लोगों ने सांप्रदायिक सद्भाव का प्रतीक माना वहीं कुछ कट्टरपंथियों को यह रास नहीं आया। सोशल मीडिया पर पटेल को सिर काटने की धमकियां मिलने लगीं। बढ़ते तनाव के बीच महाकाल थाना पुलिस ने दो आरोपियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की है।
सोशल मीडिया पर वायरल हुआ वीडियो और बढ़ते खतरे
आरएसएस शोभायात्रा पर किए गए स्वागत का वीडियो वक्फ बोर्ड ने स्वयं सोशल मीडिया पर साझा किया था। वीडियो में डॉ. सन्वर पटेल एवं बड़ी संख्या में मुस्लिम समुदाय के लोग पुष्पवर्षा करते दिखाई दे रहे हैं। वीडियो वायरल होते ही कट्टरपंथियों की प्रतिक्रियाएं आने लगीं। आरोपी फैसल खान ने सोशल मीडिया पर धमकी देते हुए लिखा कि “मुस्लिम बहुसंख्यक आएंगे और सबसे पहले तुम्हारा सिर काटा जाएगा।” इस आपत्तिजनक पोस्ट के बाद पूरे मामले में तनाव और बढ़ गया।

सिर काटने की धमकी पर वक्फ बोर्ड अध्यक्ष का मजबूत जवाब
डॉ. सन्वर पटेल धमकियों के सामने झुकने वाले नहीं दिखे। उन्होंने कहा कि वे मातृभूमि की सेवा के लिए काम कर रहे हैं। पाकिस्तान समर्थक सोच यहाँ सफल नहीं होने दी जाएगी। उन्होंने आरएसएस को राष्ट्रवादी संगठन बताते हुए कहा कि इसका स्वागत करना किसी भी तरह से गलत नहीं है। उन्होंने दावा किया कि ये धमकियां वक्फ माफिया की ओर से orchestrated हैं। पटेल ने साफ कहा कि वे इस तरह की धमकियों से डरने वाले नहीं हैं और अपना सामाजिक कर्तव्य निभाते रहेंगे।
सरकार का ज़ीरो टॉलरेंस रवैया और एफआईआर दर्ज
मध्य प्रदेश सरकार के मंत्री विश्वास कैलाश सारंग ने भी इस मामले पर कड़ा रुख अपनाया। उन्होंने कहा कि यदि किसी ने सांप्रदायिक सद्भाव की मिसाल पेश करते हुए स्वागत किया है तो इसमें कोई बुराई नहीं है। यदि किसी को इससे आपत्ति है और वह जान से मारने की धमकी देता है तो उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई होगी। यह सरकार किसी भी तरह की कट्टरपंथी धमकियों पर जीरो टॉलरेंस नीति अपनाए हुए है। इसी के चलते 9 नवंबर को महाकाल पुलिस स्टेशन में IPC की धारा 296, 351(3) एवं 351(4) के तहत दो आरोपियों पर मामला दर्ज किया गया है।
उज्जैन में सद्भाव का संदेश और बढ़ता सामाजिक विमर्श
यह घटना उज्जैन में सामाजिक समरसता और सांप्रदायिक एकता के व्यापक संदेश की ओर इशारा करती है। वक्फ बोर्ड की ओर से आरएसएस शोभायात्रा का स्वागत करना ऐसे समय में बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है जब देश में साम्प्रदायिक तनाव के कई मुद्दे उठते रहते हैं। हालांकि धमकियों ने इस सद्भाव पर सवाल जरूर खड़े किए हैं, लेकिन सरकार और प्रशासन की त्वरित कार्रवाई से माहौल को संतुलित करने की कोशिश जारी है। इस घटना ने सोशल मीडिया पर भी एक बड़ा विमर्श खड़ा कर दिया है कि क्या भारत में सद्भाव के प्रयासों को कट्टरपंथी ताकतें दबा पाएंगी या समाज शांति और एकता के रास्ते पर आगे बढ़ेगा।







