मध्य प्रदेश के सात बड़े शहरों—भोपाल, इंदौर, ग्वालियर, जबलपुर, देवास, उज्जैन और सिंगरौली—की खराब होती हवा को लेकर प्रशासन अब पूरी तरह सक्रिय हो गया है। बढ़ते प्रदूषण के बीच राज्य स्तर पर नेशनल क्लीन एयर प्रोग्राम (NCAP) की स्टीयरिंग कमेटी की अहम बैठक आयोजित की गई, जिसकी अध्यक्षता चीफ सेक्रेटरी अनुराग जैन ने की। बैठक में सभी संबंधित विभागों के प्रमुख अधिकारी मौजूद रहे।
AQI को 100 के नीचे लाने का लक्ष्य
मीटिंग में यह साफ कर दिया गया कि सातों शहरों का एयर क्वालिटी इंडेक्स (AQI) हर हाल में 100 के नीचे लाया जाएगा। इसके लिए सभी विभागों को अपने-अपने क्षेत्र में प्रदूषण घटाने के कदम तुरंत तेज़ करने के निर्देश दिए गए।
मुख्य तौर पर इन स्रोतों पर फोकस किया गया—
- कंस्ट्रक्शन साइट्स से फैलने वाली डस्ट
- सड़क धूल और ट्रैफिक एमिशन
- खुले में कचरा जलाने की घटनाएँ
- औद्योगिक क्षेत्रों से निकलने वाला धुआँ
- अनियंत्रित वाहन प्रदूषण
डस्ट कंट्रोल पर विशेष जोर
प्रशासन ने विशेष तौर पर कंस्ट्रक्शन डस्ट को प्रदूषण का बड़ा कारण मानते हुए सख्ती बढ़ाने का फैसला किया है।
निर्देशों के अनुसार—
- निर्माण स्थलों पर कवर लगाना अनिवार्य होगा
- पानी का छिड़काव सुनिश्चित किया जाएगा
- डंपिंग और स्टोरेज एरिया को पूरी तरह कवर करना होगा
- नियमों का उल्लंघन करने पर सीधा जुर्माना और कार्रवाई होगी
लोगों में जागरूकता बढ़ाने के लिए बड़ा अभियान
सरकार सिर्फ कार्रवाई ही नहीं, बल्कि नागरिकों को भी प्रदूषण नियंत्रण में भागीदार बनाने पर जोर दे रही है।
इसलिए आगामी हफ्तों में—
- बड़े पैमाने पर जागरूकता अभियान
- स्कूलों, कॉलेजों और सामाजिक संगठनों के साथ कार्यक्रम
- ग्रीन ड्राइव और मासक वितरण अभियान
चलाए जाएंगे।
30 नवंबर तक पूरी रिपोर्ट देने के निर्देश
कमेटी ने सभी विभागों को 30 नवंबर तक वर्तमान स्थिति और आगे के एक्शन प्लान की विस्तृत रिपोर्ट सौंपने का सख्त आदेश दिया है।
रिपोर्ट में यह शामिल होगा—
- अब तक उठाए गए कदम
- अगले 3–6 महीनों की कार्ययोजना
- प्रदूषण घटाने के लक्ष्यों की प्रगति
- आवश्यक संसाधनों की जरूरत
“सांस लेने लायक हवा हर नागरिक का अधिकार”
बैठक में प्रशासन ने साफ कहा कि राज्य में प्रदूषण और नहीं बढ़ने दिया जाएगा।
चीफ सेक्रेटरी के अनुसार,
“स्वच्छ हवा हर नागरिक का अधिकार है, और इसे सुनिश्चित करना सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है।”







