Singrauli News: सिंगरौली जिले में एक कथित पुलिस बर्बरता मामले पर पिछले दो दिनों से सोशल मीडिया पर जमकर चर्चा हो रही थी। वीडियो, पोस्ट और टिप्पणियों के जरिए दावा किया जा रहा था कि कलेक्ट्रेट परिसर में जमीन विवाद को लेकर पहुंचे एक व्यक्ति के साथ पुलिस ने महिलाओं और बच्चों के सामने बर्बर व्यवहार किया और उसे जबरन गाड़ी में घसीटकर बैठा लिया। लेकिन अब जिला प्रशासन की जांच में यह पूरा मामला निराधार और भ्रामक साबित हुआ है।
जांच में सामने आया सच: कोई अतिक्रमण नहीं, बल्कि शिकायतकर्ता ही कब्जाधारी
चितरंगी एसडीएम सौरभ मिश्रा द्वारा की गई जांच में स्पष्ट हुआ कि जिस जमीन पर अतिक्रमण की शिकायत की जा रही थी, वह जमीन वास्तव में शिकायतकर्ता संतराम शाह ने ही अवैध रूप से घेर रखी थी।
जांच रिपोर्ट के मुताबिक:
- विवादित भूमि ग्राम पंचायत द्वारा हरिजन बस्ती तक जाने वाले पुराने मार्ग का हिस्सा है।
- पंचायत द्वारा इस मार्ग को पुनः तैयार किया जा रहा था।
- मार्ग जिन अन्य व्यक्तियों की भूमि से होकर गुजरता है, वे सभी सहमत हैं और त्यागपत्र देने को तैयार हैं।
- सीमांकन के बाद यह पाया गया कि अनावेदक केशरी लाल शाह द्वारा कोई अतिक्रमण नहीं किया गया है।
- उलटे, आवेदक संतराम शाह ही अपने हिस्से से अधिक भूमि पर कब्जा किए हुए थे।
सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो एडिटेड निकला
जांच में यह भी सामने आया कि सोशल मीडिया पर जो वीडियो वायरल किया गया, उसे एडिट कर केवल वह हिस्सा दिखाया गया जिससे सनसनी फैलाई जा सके। पूरा घटनाक्रम हटाकर केवल पुलिस द्वारा व्यक्ति को ले जाने का हिस्सा वायरल किया गया, जिससे लोगों में गलत धारणा बनी।
प्रशासन के अनुसार, यह वीडियो भ्रामक तरीके से प्रसारित किया गया और वास्तविक परिस्थिति को छुपाया गया।
कलेक्ट्रेट में हंगामा, अधिकारियों को गालियां — रिपोर्ट में गंभीर बातें उजागर
प्रशासनिक रिपोर्ट में यह भी उल्लेख हुआ है कि संतराम शाह:
- सरपंच से लेकर विधायक तक को गाली-गलौज कर रहा था।
- सरकारी कार्य में अवरोध डालने की कोशिश कर रहा था।
- सड़क निर्माण रोकने के लिए बार-बार हंगामा कर रहा था।
- कलेक्ट्रेट कार्यालय में भी वह परिवार सहित हंगामा करने के उद्देश्य से पहुंचा था।
पुलिस जब उसे शांत कराने और थाने ले जाने पहुँची, तो उसने वहीं पर और अधिक हंगामा किया, जिसके बाद उसे हिरासत में लिया गया।
पुलिस ने दर्ज किया मामला
28 नवंबर 2025 को इस प्रकरण में थाने में शिकायत दर्ज की गई, जिसके आधार पर पुलिस ने संतराम शाह के खिलाफ BNS की धारा 126(2), 296(a) और 351(3) के तहत मुकदमा दर्ज किया है।
एसडीएम सौरभ मिश्रा ने कहा — ‘झूठे आरोप बेहद दुर्भाग्यपूर्ण’
एसडीएम मिश्रा ने मीडिया को बताया कि यह अत्यंत दुर्भाग्यपूर्ण है कि तथ्यहीन आरोपों को सनसनी बनाकर सोशल मीडिया में फैलाया गया।
उन्होंने स्पष्ट कहा:
“जांच में पुलिस पर लगाए गए सभी आरोप असत्य पाए गए हैं। वीडियो का कुछ हिस्सा काटकर गलत छवि बनाने की कोशिश की गई। सच्चाई यह है कि आवेदक स्वयं ही अवैध कब्जाधारी था और सरकारी कार्य में बाधा डाल रहा था।”
सोशल मीडिया पर फैलाई गई अफवाहों पर प्रशासन सख्त
प्रशासन अब उन लोगों की पहचान भी कर रहा है जिन्होंने एडिटेड वीडियो प्रसारित कर गलत जानकारी फैलाई। अधिकारियों का कहना है कि भविष्य में ऐसी भ्रामक सामग्री फैलाने वालों पर कार्रवाई भी की जा सकती है।







