मध्य प्रदेश में कड़ाके की ठंड का असर, इंदौर-भोपाल समेत कई शहरों में रिकॉर्ड गिरावट

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MP Weather Update News: मध्य प्रदेश इस समय कड़ाके की ठंड की चपेट में है। राज्य में सर्दी ने पुराने रिकॉर्ड तोड़ दिए हैं। इंदौर में बीते दस वर्षों में रात का सबसे कम तापमान दर्ज किया गया, जिससे आम जनजीवन बुरी तरह प्रभावित हुआ है। राजधानी भोपाल में भी न्यूनतम तापमान 7 डिग्री सेल्सियस से नीचे चला गया है, जबकि कई जिलों में पारा 5 डिग्री के आसपास पहुंच गया है।

तेज ठंडी हवाओं और शीतलहर के कारण सुबह और रात के समय ठिठुरन बढ़ गई है। हालात ऐसे हैं कि लोग बेहद जरूरी काम होने पर ही घरों से बाहर निकल रहे हैं। कई इलाकों में सड़कों पर सन्नाटा पसरा नजर आ रहा है, वहीं बाजारों की रौनक भी कम हो गई है।

उत्तर भारत की बर्फबारी का असर

मौसम विभाग के मुताबिक, उत्तर भारत में हो रही बर्फबारी और सक्रिय जेट स्ट्रीम के चलते मध्य प्रदेश में ठंड और तेज हो गई है। उत्तर दिशा से लगातार ठंडी हवाएं राज्य में प्रवेश कर रही हैं, जिससे न्यूनतम तापमान में लगातार गिरावट दर्ज की जा रही है। खासतौर पर रात के समय सर्दी ज्यादा असर दिखा रही है।

इन शहरों में सबसे ज्यादा ठंड

प्रदेश के कई शहरों में न्यूनतम तापमान सामान्य से काफी नीचे चला गया है। कटियाघाट (ओछाड़ी) में 5.1 डिग्री, रायगढ़ और पचमढ़ी में 5.2 डिग्री, ग्वालियर क्षेत्र में 5.8 डिग्री तापमान दर्ज किया गया। मंदसौर, नौगोंग, उमरिया और रीवा समेत कई जिलों में भी ठंड ने लोगों को कंपकंपा दिया है। भोपाल के बैरागढ़ इलाके में तापमान 7.2 डिग्री रिकॉर्ड किया गया।

जनजीवन पर असर

कड़ाके की ठंड का सबसे ज्यादा असर बच्चों, बुजुर्गों और बीमार लोगों पर देखा जा रहा है। ग्रामीण इलाकों में लोग अलाव जलाकर ठंड से बचाव कर रहे हैं। स्कूल जाने वाले बच्चों और सुबह जल्दी काम पर निकलने वालों को काफी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।

अगले कुछ दिनों का मौसम

मौसम विभाग ने फिलहाल राहत की बात कही है कि अगले तीन दिनों तक शीतलहर को लेकर कोई नया अलर्ट जारी नहीं किया गया है। हालांकि ठंड का असर बना रहेगा और तापमान में तुरंत किसी बड़ी बढ़ोतरी की संभावना नहीं है। विशेषज्ञों का कहना है कि उत्तर भारत में मौसम सामान्य होने के बाद ही मध्य प्रदेश को ठंड से राहत मिल पाएगी।

देवेन्द्र पाण्डेय "संपादक"

ऋषि श्रृंगी मुनि की तपोभूमि सिंगरौली की पावन धरा से निकला. पठन-पाठन से प्यार था लिहाजा पत्रकारिता से बेहतर पेशा कोई और लगा नहीं. अखबार से शुरु हुआ सफर टीवी और डिजिटल मीडिया के माध्यम में जारी है. इस दौरान करीब 14 साल गुजर गए पता ही नहीं चला. Read More
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