संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की बैठक में भारत के स्थायी प्रतिनिधि परवथानेनी हरीश ने जोरदार तरीके से मध्य पूर्व खासकर फिलिस्तीन संकट पर भारत का पक्ष रखा। उन्होंने कहा कि इस क्षेत्र में चल रहे मानवीय संकट को किसी भी हालत में और नहीं बढ़ने दिया जाना चाहिए। भारत हमेशा से इस मत पर रहा है कि युद्ध किसी समस्या का समाधान नहीं है। हमें ऐसे रास्ते खोजने होंगे जिससे शांति का रास्ता खुल सके।
बातचीत ही है स्थायी समाधान
भारतीय राजदूत ने दो टूक कहा कि मध्य पूर्व में शांति स्थापित करने का एकमात्र रास्ता बातचीत और कूटनीति है। उन्होंने कहा कि युद्ध में जो भी नुकसान हो रहा है उससे न केवल इंसानी जानें जा रही हैं बल्कि भविष्य भी खतरे में पड़ रहा है। भारत की नीति हमेशा रही है कि सबको साथ लेकर चलना है और किसी को भी पीछे नहीं छोड़ना है।
युद्ध विराम की मांग जरूरी
परवथानेनी हरीश ने कहा कि अगर हमें आगे बढ़ना है तो सबसे पहला कदम युद्ध विराम होना चाहिए। जब तक युद्ध नहीं रुकेगा तब तक किसी भी समाधान की उम्मीद करना व्यर्थ है। इसके साथ ही उन्होंने बंधकों की रिहाई की भी मांग की और कहा कि किसी भी सभ्य समाज में इस तरह की घटनाओं की कोई जगह नहीं होनी चाहिए।
मानवीय सहायता हो समय पर
भारत ने इस बात पर विशेष जोर दिया कि मध्य पूर्व में चल रहे संकट के बीच मानवीय सहायता को समय पर और सुरक्षित रूप से वहां के लोगों तक पहुंचाया जाना जरूरी है। उन्होंने कहा कि यह सिर्फ सहायता नहीं बल्कि मानवता की परीक्षा है। भारत ने हमेशा दूसरों की मदद की है और आज भी वही भावना उसके रुख में दिखती है।
बच्चों की शिक्षा और अस्पताल तबाह
विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार गाजा में 95% से ज्यादा अस्पताल तबाह हो चुके हैं। संयुक्त राष्ट्र की रिपोर्ट के मुताबिक 6.5 लाख से अधिक बच्चे 20 महीनों से स्कूल नहीं जा पाए हैं। यह सिर्फ आंकड़े नहीं हैं बल्कि एक पीढ़ी का भविष्य है जो खतरे में है। भारत ने साफ कहा कि इस दुखद मानवीय संकट को और नहीं बढ़ने दिया जाना चाहिए।







