राज्यसभा में बुधवार को ‘ऑपरेशन सिंदूर’ को लेकर चर्चा गर्म रही। समाजवादी पार्टी की राज्यसभा सांसद और फिल्म अभिनेत्री जया बच्चन ने सरकार पर भावुक होकर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि जिस हमले में कई महिलाओं की मांग का सिंदूर उजड़ गया, उस सैन्य कार्रवाई को ‘ऑपरेशन सिंदूर’ कहना बेहद असंवेदनशील और पीड़ादायक है। यह बयान देते हुए जया भावुक हो गईं और उनके शब्दों ने सदन का ध्यान खींचा।
जया बच्चन ने उठाए नाम पर सवाल – “किसी संवेदनशील लेखक से पूछ लेते”
जया ने सरकार से पूछा कि इतने सक्षम और बड़े-बड़े लेखकों को रखने के बावजूद इस ऑपरेशन का नाम ‘सिंदूर’ क्यों रखा गया? उन्होंने कहा कि जिन महिलाओं के पति शहीद हुए, उनके सिंदूर मिटे और आपने उसी नाम पर यह ऑपरेशन चलाया। उन्होंने यह भी कहा कि यह नाम शहीदों के परिजनों की भावनाओं के साथ क्रूर मज़ाक जैसा है। उनके अनुसार, इससे सरकार की असंवेदनशीलता झलकती है।

“370 हटाने के बाद आतंक खत्म होने का दावा झूठा साबित हुआ” – जया बच्चन
जया बच्चन ने सरकार को याद दिलाया कि अनुच्छेद 370 हटाते समय यह दावा किया गया था कि कश्मीर में आतंकवाद समाप्त हो जाएगा। लेकिन पवित्र यात्रा पर निकले श्रद्धालुओं पर हमला इस दावे को झूठा साबित करता है। उन्होंने कहा कि श्रद्धालु इसलिए निडर होकर कश्मीर गए क्योंकि उन्हें भरोसा था कि अब सब सुरक्षित है। लेकिन उनके साथ जो हुआ, वह सरकार की विफलता का प्रमाण है।
भाषण में खलल पड़ा तो भड़कीं जया – “मैं सुन सकती हूं, मत रोकिए”
अपने भाषण के दौरान जब कुछ सांसदों ने टोका-टोकी शुरू की तो जया बच्चन भड़क गईं। उन्होंने साफ शब्दों में कहा, “मेरे कान तेज़ हैं, सब सुन सकती हूं। मुझे मत रोको।” उन्होंने शिवसेना (UBT) की सांसद प्रियंका चतुर्वेदी से भी कहा, “मुझे कंट्रोल मत करो।” जया ने यह भी कहा कि जब पुरुष बोलते हैं तब उन्हें नहीं टोकते, तो महिला बोल रही है तो भी चुप रहिए।
विपक्ष का हमला, सरकार का बचाव – ‘ऑपरेशन सिंदूर’ बना बहस का मुद्दा
संसद के मानसून सत्र में ‘ऑपरेशन सिंदूर’ अब राजनीतिक बहस का प्रमुख मुद्दा बन गया है। विपक्ष जहां इसे भावनाओं से जुड़ा और असंवेदनशील नाम बता रहा है, वहीं सरकार इसे आतंकवाद के खिलाफ जवाबी कार्रवाई करार दे रही है। दोनों पक्षों के बीच तीखी बहस हो रही है और संसद में आरोप-प्रत्यारोप का सिलसिला तेज़ हो गया है।







