शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे गुट) के सांसद संजय राउत ने भारत और पाकिस्तान के बीच होने वाले क्रिकेट मैचों पर कड़ी आपत्ति जताई है। उन्होंने इसे “अमानवीय कदम” बताते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखा है। राउत ने सवाल उठाया कि जब सरकार कहती है कि “खून और पानी साथ नहीं बह सकते” तो फिर क्रिकेट खेलने की तैयारियां क्यों की जा रही हैं? उन्होंने कहा कि अब क्या “खून और क्रिकेट साथ-साथ बहेंगे”? संजय राउत का कहना है कि ऐसे समय में पाकिस्तान के साथ क्रिकेट खेलना देश और शहीदों का अपमान है।
सोशल मीडिया पर साझा किया पत्र
संजय राउत ने अपना पत्र सोशल मीडिया पर साझा किया और लिखा कि पहलगाम आतंकी हमले में शहीद हुए भारतीयों का खून अभी सूखा भी नहीं है और उनके परिवारों के आंसू भी थमे नहीं हैं, ऐसे में पाकिस्तान के साथ क्रिकेट खेलना अमानवीय है। उन्होंने आरोप लगाया कि केंद्रीय खेल मंत्रालय ने एशिया कप में भारत-पाकिस्तान मैचों को हरी झंडी दे दी है और यह प्रधानमंत्री तथा गृह मंत्रालय की सहमति के बिना संभव नहीं था। राउत ने कहा कि यह कदम देश की जनता के लिए बेहद दुखद है और शहीदों के बलिदान का अपमान है।
देशभक्ति और शहीदों के सम्मान पर सवाल
अपने पत्र में संजय राउत ने आगे लिखा कि अगर पाकिस्तान के खिलाफ अभी भी संघर्ष जारी है और ऑपरेशन सिंदूर पूरा नहीं हुआ है, तो ऐसे में क्रिकेट खेलना किस तरह से उचित ठहराया जा सकता है? उन्होंने याद दिलाया कि पहलगाम हमले में पाकिस्तानी आतंकी संगठन ने 26 महिलाओं का सिंदूर मिटा दिया था। क्या सरकार ने उन माताओं और बहनों की भावनाओं पर विचार किया है? राउत ने यह भी सवाल उठाया कि क्या अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति ट्रंप ने भारत को क्रिकेट खेलने के लिए कोई दबाव डाला था? साथ ही उन्होंने आरोप लगाया कि भारत-पाकिस्तान मैचों पर बड़े स्तर पर सट्टेबाज़ी और ऑनलाइन जुआ होता है, जिसमें बीजेपी से जुड़े लोग भी शामिल हैं।
शहीदों और सैनिकों का अपमान बताया
संजय राउत ने प्रधानमंत्री से कहा कि पाकिस्तान के साथ क्रिकेट खेलना सिर्फ सैनिकों की बहादुरी का अपमान नहीं है, बल्कि हर उस शहीद का अपमान है जिसने कश्मीर और देश की रक्षा में अपना बलिदान दिया। उन्होंने कहा कि ये मैच दुबई में हो रहे हैं, अगर महाराष्ट्र में होते तो बालासाहेब ठाकरे की शिवसेना इन्हें रोक देती। राउत ने आरोप लगाया कि हिंदुत्व और देशभक्ति से ऊपर क्रिकेट को प्राथमिकता देकर सरकार देशवासियों की भावनाओं को ठेस पहुंचा रही है। उन्होंने अंत में साफ कहा कि शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे गुट) इस निर्णय की कड़ी निंदा करती है और इसे देश के शहीदों का अपमान मानती है।







