सोना सिर्फ निवेश नहीं, बल्कि प्यार और परंपरा! भारत में गोल्ड ज्वेलरी की अनकही कहानी

By: MPLive Team

On: Wednesday, October 8, 2025 9:23 AM

सोना सिर्फ निवेश नहीं, बल्कि प्यार और परंपरा! भारत में गोल्ड ज्वेलरी की अनकही कहानी
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भारत में सोने के गहनों के प्रति लोगों का प्रेम सदियों पुराना है। विवाह, त्योहार और अन्य अवसरों पर सोना खरीदना एक परंपरा रही है। यहाँ पीढ़ियों से लोग सोना इकट्ठा करते आए हैं। यह केवल एक गहना नहीं, बल्कि एक सुरक्षित निवेश भी माना जाता है क्योंकि आर्थिक अस्थिरता और बाजार की उतार-चढ़ाव के बावजूद इसका मूल्य स्थिर रहता है। हालांकि, कुछ लोग सोचते हैं कि यदि सोना लंबे समय तक इस्तेमाल न किया जाए तो यह जंग खा सकता है, खराब या फीका पड़ सकता है।

जंग क्या है और क्यों होती है

विज्ञान की भाषा में, जंग लोहा ऑक्साइड है। जंग केवल लोहे और लोहे के मिश्रधातु पर होती है। जब लोहे की सतह पर नमी और ऑक्सीजन प्रतिक्रिया करती है, तो उसके ऊपर एक गहरा लाल परत बन जाती है, जिसे हम जंग कहते हैं। रासायनिक दृष्टि से यह प्रक्रिया इस तरह होती है कि धातु की सतह ऑक्साइड में बदल जाती है, जैसे लोहे का ऑक्सीजन के साथ मिलकर फेरिक ऑक्साइड (Fe₂O₃) बनाना। लोहे और इसके मिश्रधातुओं के नट, बोल्ट, फैन, साइकिल की चेन और वाहन के पुर्ज़े जंग से बचाने के लिए समय-समय पर तेल, ग्रीस और पेंटिंग की जरूरत होती है।

सोना सिर्फ निवेश नहीं, बल्कि प्यार और परंपरा! भारत में गोल्ड ज्वेलरी की अनकही कहानी

क्या सोना जंग खा सकता है?

सोने से बने गहनों को कम तापमान पर पिघलाकर तैयार किया जाता है। सोना सामान्य अम्लों के साथ प्रतिक्रिया नहीं करता। यह केवल एक विशेष अम्ल एक्वा रेजिया (नाइट्रिक एसिड और हाइड्रोक्लोरिक एसिड का मिश्रण) में घुलता है। भारतीय मानक ब्यूरो (BIS) के अधिकारियों का कहना है कि सोना कभी जंग नहीं खाता। इसके विपरीत, चांदी वायुमंडल में मौजूद सल्फर के साथ थोड़ी बहुत प्रतिक्रिया करती है। पीतल (ब्रास) तांबा और जस्ता का मिश्रण है। यह जंग नहीं खाता, बल्कि धीरे-धीरे करोज़न (संक्षारण) होता है। तांबे में भी अत्यधिक अम्लों के साथ प्रतिक्रिया नहीं होती, और यह लंबे समय तक सुरक्षित रहता है।

सोना क्यों सुरक्षित है

सोने के गहनों की 14 कैरेट या उच्च शुद्धता वाली धातु कभी जंग नहीं खाती। भले ही गहना पुराना हो या लंबे समय तक इस्तेमाल न किया गया हो, इसमें जंग का खतरा नहीं होता। लंबे समय तक न इस्तेमाल होने पर सोने की सतह पर हल्की पीली-हरी परत पड़ सकती है, लेकिन इसे जंग नहीं कहा जा सकता। इतिहास में भी सोने के सिक्के और गहने, जो जमीन में सदियों तक दफन रहे, जंग से मुक्त पाए गए। इसका कारण यह है कि सोने के परमाणु अत्यंत स्थिर होते हैं। यही स्थिरता सोने को हवा, पानी और अत्यधिक तापमान में भी बदलने नहीं देती। इसी कारण सोने का उपयोग इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों और सर्किट बोर्ड में भी किया जाता है।

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