हिमाचल प्रदेश के चंबा जिले में बुधवार तड़के एक बार फिर भूकंप के झटके महसूस किए गए। राष्ट्रीय भूकंप विज्ञान केंद्र (NCS) के अनुसार, पहला झटका सुबह 3 बजकर 27 मिनट पर आया जिसकी तीव्रता 3.3 रिक्टर स्केल मापी गई। वहीं दूसरा झटका 4 बजकर 39 मिनट पर आया और इसकी तीव्रता 4 रिक्टर स्केल दर्ज की गई। लगातार दो झटकों से लोगों में दहशत फैल गई और वे घरों से बाहर निकल आए। हालांकि राहत की बात यह रही कि अब तक किसी तरह के जान-माल के नुकसान की खबर सामने नहीं आई है।
भारी बारिश से बढ़ा संकट, पुल और दुकानें बह गईं
भूकंप के झटकों के साथ ही भारी बारिश ने भी हिमाचल की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। कुल्लू जिले के कानोन गांव में बादल फटने से अचानक आई बाढ़ में एक पुल और तीन दुकानें बह गईं। लगातार हो रही बारिश से भूस्खलन का खतरा बढ़ गया है, जिस कारण जिला प्रशासन ने मंगलवार को कुल्लू और बंजार उपमंडल में सभी शैक्षणिक संस्थान, जिनमें स्कूल, कॉलेज और आंगनबाड़ी केंद्र शामिल हैं, बंद करने का आदेश दिया। कुल्लू की उपायुक्त और जिला आपदा प्रबंधन प्राधिकरण की अध्यक्ष तोरू एस. रविश ने बताया कि यह कदम छात्रों की सुरक्षा के मद्देनजर उठाया गया है।
शिमला और मंडी में भूस्खलन से हालात बिगड़े
लगातार बारिश और भूस्खलन ने राजधानी शिमला में भी लोगों को परेशान कर दिया। सोमवार देर रात रामचंद्र चौक के पास हुए भूस्खलन के बाद करीब 40 लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया गया, जिनमें मंत्री, विधायक और सरकारी कर्मचारी भी शामिल थे। तकनीकी शिक्षा मंत्री राजेश धर्माणी और कांग्रेस विधायक रामकुमार चौधरी व आशीष बुटैल को अपने सरकारी आवास खाली करने पड़े। हालांकि किसी के हताहत होने की खबर नहीं है, लेकिन छोटा शिमला क्षेत्र में पेड़ गिरने और इमारत की छत को नुकसान पहुंचने की जानकारी मिली है। इसी तरह मंडी जिले के पधर क्षेत्र की शिल्हबुधानी और तरसावन पंचायतों में भारी बारिश से एक पैदल पुल, एक दुकान और एक वाहन क्षतिग्रस्त हो गए, जबकि कृषि भूमि को भी नुकसान पहुंचा।
किन्नौर कैलाश यात्रा रद्द, प्रशासन ने जारी किया आदेश
लगातार खराब मौसम और भूस्खलन को देखते हुए किन्नौर जिला प्रशासन ने मंगलवार को किन्नौर कैलाश यात्रा-2025 को तत्काल प्रभाव से रद्द करने का बड़ा फैसला लिया। उपायुक्त डॉ. अमित कुमार शर्मा ने बताया कि मौसम विभाग ने अगले पांच से सात दिनों तक भारी बारिश और घना कोहरा बने रहने की चेतावनी दी है। ऐसे हालात में श्रद्धालुओं की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए यह निर्णय लिया गया। उन्होंने आपदा प्रबंधन अधिनियम, 2005 की धारा 34 के तहत आदेश जारी करते हुए साफ कहा कि कोई भी यात्री अगर यात्रा मार्ग पर पाया गया तो उसे तुरंत बेस कैंप वापस भेज दिया जाएगा और उल्लंघन करने वालों पर कानूनी कार्रवाई भी की जाएगी।







