इंदौर MYH अस्पताल में नवजात की दर्दनाक मौत, चूहों का हमला या लापरवाही? सच पढ़कर रोंगटे खड़े हो जाएंगे

By: MPLive Team

On: Wednesday, September 3, 2025 7:13 PM

इंदौर MYH अस्पताल में नवजात की दर्दनाक मौत, चूहों का हमला या लापरवाही? सच पढ़कर रोंगटे खड़े हो जाएंगे
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मध्य प्रदेश के इंदौर से सामने आई तस्वीरों ने पूरे देश को झकझोर दिया है। सरकारी महाराजा यशवंतराव अस्पताल (MYH) में चूहों के हमले की शिकार दूसरी नवजात बच्ची की बुधवार को मौत हो गई। आठ दिन की इस बच्ची का नाम रिहाना था। इससे पहले मंगलवार को भी एक अन्य नवजात बच्ची की जान चली गई थी। दोनों ही बच्चियों के हाथ-पाँव चूहों ने काट खाए थे। इस घटना का वीडियो भी सोशल मीडिया पर सामने आया है, जिसमें अस्पताल के वार्ड में चूहे घूमते हुए देखे गए।

अस्पताल प्रशासन का दावा – बीमारी से हुई मौत

MYH के डिप्टी सुपरिंटेंडेंट डॉ. जितेंद्र वर्मा ने बताया कि रिहाना की मौत चूहों के हमले से नहीं, बल्कि सेप्टीसीमिया (खून का संक्रमण) के कारण हुई। उन्होंने कहा कि बच्ची का वजन केवल 1.60 किलो था और जन्म से ही उसमें कई जन्मजात विकृतियाँ थीं, जिनमें आंतों की समस्या भी शामिल थी। सात दिन पहले अस्पताल में उसका ऑपरेशन भी किया गया था और उसकी हालत लगातार गंभीर बनी हुई थी। डॉक्टर ने बताया कि चूहों ने बच्ची के हाथ की दो उँगलियों पर हल्के निशान जरूर बनाए, लेकिन मौत का कारण संक्रमण ही है। परिवार की इच्छा के कारण पोस्टमॉर्टम नहीं किया गया और शव परिजनों को सौंप दिया गया।

मंगलवार को भी गई एक नवजात की जान

इससे पहले मंगलवार को भी MYH में चूहों के हमले की शिकार एक अन्य नवजात की मौत हो गई थी। अस्पताल प्रशासन का कहना है कि वह बच्ची निमोनिया संक्रमण से पीड़ित थी और इसी कारण उसकी मौत हुई। दोनों ही बच्चियाँ अस्पताल के पीआईसीयू (PICU) वार्ड में भर्ती थीं। यह वार्ड उन नवजात शिशुओं के लिए होता है जिनकी हालत नाजुक होती है और जहाँ सामान्यतः डॉक्टरों और नर्सों के अलावा किसी को प्रवेश की अनुमति नहीं होती। बावजूद इसके, यहाँ चूहों का प्रवेश कर बच्चों को काट लेना गंभीर लापरवाही को उजागर करता है।

जिम्मेदारों पर कार्रवाई, निजी फर्म पर जुर्माना

घटना सामने आने के बाद अस्पताल प्रशासन ने तत्काल कार्रवाई की है। शुरुआती जाँच के आधार पर दो नर्सिंग अधिकारियों को निलंबित कर दिया गया है, जबकि नर्सिंग अधीक्षक को पद से हटा दिया गया है। इसके अलावा अस्पताल की सफाई, सुरक्षा और पेस्ट कंट्रोल का ठेका संभालने वाली एक निजी कंपनी पर 1 लाख रुपये का जुर्माना लगाया गया और उसे चेतावनी पत्र जारी किया गया है। इसके बावजूद सवाल यह उठता है कि जिस पीआईसीयू वार्ड में बच्चों की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता होनी चाहिए, वहाँ चूहों का प्रवेश आखिर कैसे हुआ। यह घटना न केवल अस्पताल प्रबंधन की लापरवाही को उजागर करती है, बल्कि राज्य की स्वास्थ्य व्यवस्था पर भी गंभीर सवाल खड़े करती है।

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