सीएम मोहन यादव का बड़ा ऐलान: गाय के गोबर और मूत्र से बनाए जा सकेंगे करोड़ों के व्यवसाय, जानिए कैसे

By: MPLive Team

On: Monday, September 8, 2025 7:02 PM

सीएम मोहन यादव का बड़ा ऐलान: गाय के गोबर और मूत्र से बनाए जा सकेंगे करोड़ों के व्यवसाय, जानिए कैसे
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मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने सोमवार, 8 सितंबर को कहा कि आत्मनिर्भर गौशालाएं राज्य की अर्थव्यवस्था में महत्वपूर्ण योगदान दे सकती हैं। उनका कहना है कि गाय के गोबर, मूत्र जैसे अपशिष्ट से आय अर्जित कर गौशालाओं को समृद्ध बनाया जा सकता है। इसी को ध्यान में रखते हुए मुख्यमंत्री ने निर्देश दिए कि गाय के दूध और उससे बने उत्पादों के साथ-साथ गोबर, गोमूत्र से तैयार उत्पादों की बिक्री के लिए उचित व्यवस्थाएं की जाएं। यह कदम न केवल गौशालाओं को आत्मनिर्भर बनाएगा, बल्कि किसानों की आय में भी वृद्धि करेगा।

देसी नस्ल की गायों को बढ़ावा और सौर ऊर्जा का उपयोग

सीएम ने गौशालाओं में उपलब्ध स्थान का उपयोग सौर ऊर्जा से बिजली उत्पादन के लिए करने का सुझाव दिया। उन्होंने कहा कि राज्य के विभिन्न क्षेत्रों में स्थानीय परिस्थितियों के अनुसार देसी गायों की नस्ल को बढ़ावा देना चाहिए। इसके साथ ही धार्मिक संस्थाओं और दानदाताओं को गौशालाओं के प्रबंधन में शामिल किया जाना चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि राज्य में पशु चिकित्सकों की संख्या पशुधन के अनुपात में कम है। बेहतर प्रबंधन और दूध उत्पादन बढ़ाने के लिए पशु चिकित्सकों की संख्या बढ़ाना आवश्यक है।

सीएम मोहन यादव का बड़ा ऐलान: गाय के गोबर और मूत्र से बनाए जा सकेंगे करोड़ों के व्यवसाय, जानिए कैसे

ट्राइबल क्षेत्रों में पशुपालन को बढ़ावा

मुख्यमंत्री ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के दृष्टिकोण के अनुरूप गिर, सहिवाल, मालवी और नागौरी नस्ल की गायों को बढ़ावा देने की आवश्यकता पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि राज्य के आदिवासी क्षेत्रों में भी पशुपालन गतिविधियों को बढ़ाने के लिए आवश्यक नवाचार किए जाएं। पशुपालन, कृषि, बागवानी और अक्षय ऊर्जा के क्षेत्र में समन्वित कार्य करने से किसानों की आय बढ़ेगी और राज्य देश में दूध उत्पादन के शीर्ष राज्यों में शामिल हो सकेगा।

गौशाला बोर्ड की उपलब्धियां और भविष्य की योजना

बैठक में यह जानकारी दी गई कि गौ संवर्धन बोर्ड सीधे राज्य स्तर से गौशाला समितियों के बैंक खातों में राशि हस्तांतरित कर रहा है। अब तक 937 नई गौशालाओं की स्थापना के बाद उन्हें पंजीकृत किया गया है, जिसमें 1 लाख 10 हजार पशु आश्रय प्राप्त कर रहे हैं। वर्ष 2024-25 में विदिशा, देवास, अगर-मालवा, ग्वालियर, दमोह, सतना और रीवा में बायोगैस-संयुक्त जैविक खाद निर्माण संयंत्र स्थापित किए गए। ग्वालियर, इंदौर और उज्जैन नगर निगमों ने बड़े गौशालाओं का संचालन शुरू कर दिया है। भोपाल और जबलपुर में गौशालाओं की स्थापना का काम जारी है। बैठक में आत्मनिर्भर गौशालाओं की नीति की प्रगति की समीक्षा भी की गई और आगामी योजनाओं पर चर्चा की गई।

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